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Showing posts from 2005

एक कविता फिर से

आलू बुखारा

भंवर

चश्मा

अपवाद

Fog

तुम्हारा कभी कोई नाम ना था

सर्दियाँ

माया

परिधि

विलाप

29 अक्तूबर 05

निर्मल वर्मा

पहली किताब से

जाना कुछ

कभी नहीं जैसे कितनी बार

भूकंप

कुछ मौसम ऐसा

नदी किनारे

बारिश

"The poet's condition"

तु्म्हारा नाम

पतझर

पहचान

ना पत्थर ना आकाश ना पानी

इतने सवाल फिर भी

कौन

पहचान पत्र

मचान

अर्थ

चाबी

आवाज

दिन

कोई आकर पूछे

कुछ तस्वीरें

समुंदर के किनारे

जगह

अर्धसत्य

लकीर

इतना भर

दरवाजा

गरमी गरमी

सवाल

सन्नाटा

अवाक

धूमकेतू

हिन्दी

पत्थर बाबा

आता हुआ अतीत

छतरी

रविवार

जो देखा भूलने से पहले

दोपहर

सोमवार