लकीर


मैंने तो कभी नहीं कहा मैं खींच रहा हूँ आकाश पर लकीर, मैंने बस बोलते हुए सोचा
आकाश पर लकीर खींच रहा हूँ ,
कि
नींद खुल गई यह देखकर


17.7.05 © मोहन राणा

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