अर्धसत्य



....पर अर्धसत्य - आधा सच आधा झूठ ही तो है. दोनों एक साथ .
एक देह में दो टुकड़े आत्मा - यह बँटवारा
जैसे मुस्कराहट भी भय की पहचान हो



17.7.05 © मोहन राणा

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