मचान

आकाश नजदीक था
सीढ़ियाँ अंतहीन
और ऊँचाई बहुत पास
कि छू कर बदल दूँ रंग आकाश का
कुछ और उठा दूँ पहाड़ों को
रोक दूँ समय को लाल टाइलों की छतों पर,
पर डर से देखता नहीं नीचे
बढ़ती गहराई को



4/9/05 © mohan rana
Guinigi Tower Lucca

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