Wednesday, September 07, 2005

पहचान पत्र

धीरे धीरे चलती है इंतजार की घड़ी
और समय भागता है समय की परछाईयों में
रोशनी के छद्म रुपों में,
मैंने चुना है यह मुखौटा
केवल पहचान पत्र के लिए


© 8.9.05 मोहन राणा

रेत का पुल/ RET KA PUL

Mohan Rana's poetry is always tuned to sounds from near and afar. At the same time it captures in its images the essence of close and ...