Friday, January 27, 2012

नीलाकाश















बारिश हो रही है कहते ही
रुक जाती एक वाक्य जितनी लंबी,
अपने ही अनुभव पर होने लगता है अविश्वास
चमकते नीलाकाश को देख


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रेत का पुल/ RET KA PUL

Mohan Rana's poetry is always tuned to sounds from near and afar. At the same time it captures in its images the essence of close and ...