Posts

Showing posts from 2015

जाता वही आता

तभी तो

नक़्शानवीस

आएगा संदीपन यहाँ

कुछ कहना / The Blue-Eyed Blackbird

आलंबन

होगा एक और शब्द

दिलवाया उर्फ हटवाया

दो कविताएँ- एक जिल्द

जो हुआ खुश

बम भरम अगड़ बगड़

नक्शे में रेखा