Tuesday, October 23, 2018

Mohan Rana Chapbook SOLD OUT


यह कविता संग्रह अब उपलब्ध नहीं है आशा है,  नया संस्करण आएगा।
Mohan Rana Chapbook SOLD OUT

Published  2011
£4
Publisher: The Poetry Translation Centre
ISBN: 978-0-9560576-5-5
Featured poets: Mohan Rana
Featured translators: Bernard O’Donoghue, Lucy Rosenstein
This dual-language chapbook introduces the poetry of Indian poet Mohan Rana, translated by Bernard O'Donoghue and Lucy Rosenstein.





Tuesday, October 09, 2018

इतना लिखा गया चिड़िया उड़ना भूल गई



गौरया 

इतना लिखा गया चिड़िया को लेकर हिन्दी  में कि 
किसी को याद नहींउस चिड़िया का नाम
कि वह विलुप्त हो चुकी,
पर कविता में वह कमज़ोर का हक माँगती रही
रक्त की गोंद से खुंचे शब्दों  में  जैसे पंख
जो मुंडेरों से गिरते हुए भी सपने देखते हैं उड़ानों की
 
वे व्यंजक काग़ज़ के शांति दूत मान लिये गए
कवियों को पुरस्कार मिले पर परेशान वे सूचियों  में अपने नाम की मिलान ,
बचे खुचे किसी का ध्यान ही नहीं गया
शहर के आकाश पर मंडराती पर किसे चुग गई चील 
एक लंबी आवाज़ लेती  दोपहर  विगत उसांस में ।


20.3.2016 ©

रेत का पुल/ RET KA PUL

Mohan Rana's poetry is always tuned to sounds from near and afar. At the same time it captures in its images the essence of close and ...